सुरक्षा प्रमाणपत्र एवं मुख्यालय

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सुरक्षा प्रमाणपत्र एवं मुख्यालय

यह प्रभाग सफलतापूर्वक परीक्षण किए गए दूरसंचार उपकरणों के लिए सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करने के लिए जिम्मेदार है।

भारतीय टेलीग्राफ नियम, 1951, भाग XI, टेलीग्राफ का परीक्षण और प्रमाणन (नियम 528 से 537) में प्रावधान है कि प्रत्येक दूरसंचार उपकरण को पहले अनिवार्य परीक्षण और प्रमाणन से गुजरना होगा। प्रमाणन प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती है कि प्रत्येक दूरसंचार उपकरण आवश्यक देश विशिष्ट दूरसंचार सुरक्षा मानकों और आवश्यकताओं अर्थात भारतीय दूरसंचार सुरक्षा आश्वासन आवश्यकताओं (ITSARs) का अनुपालन करता है।

इसके बाद, कोई भी मूल उपकरण निर्माता (OEM)/ आयातक/ डीलर जो भारत में किसी भी दूरसंचार उपकरण को बेचना, आयात करना या उपयोग करना चाहता है, उसे NCCS द्वारा अपने उपकरण की सुरक्षा जांच और प्रमाणन करवाना होगा। योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।

सुरक्षा प्रमाणन के दायरे में भारत में बेचे जाने वाले या संचार सुरक्षा प्रमाणन (ComSec) योजना के प्रभावी होने की तिथि के बाद भारतीय दूरसंचार नेटवर्क से जुड़ने वाले सभी प्रकार के दूरसंचार उपकरण शामिल हैं, जिसके लिए ITSAR उपलब्ध है और लागू है (सरकार द्वारा अलग से अधिसूचित की जाने वाली तिथि से)।

अपने उपकरणों को प्रमाणित करवाने के इच्छुक आवेदकों को एमटीसीटीई पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। सफल मूल्यांकन के बाद, आवेदक लागू आईटीएसएआर के विरुद्ध अपने उपकरणों के सुरक्षा परीक्षण के लिए एक निर्दिष्ट टीएसटीएल चुन सकता है। परीक्षण पूरा होने के बाद, टीएसटीएल द्वारा प्रस्तुत परीक्षण रिपोर्ट का एनसीसीएस द्वारा सुरक्षा प्रमाणन के लिए मूल्यांकन किया जाएगा। सफल मूल्यांकन के बाद, एनसीसीएस के सुरक्षा प्रमाणन प्रभाग द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।

उपकरणों के लिए जारी किए गए सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी होने की तारीख से दस साल के लिए वैध होंगे, जो समय-समय पर संशोधित लागू आईटीएसएआर के अनुपालन के अधीन होंगे। इसके अलावा, अगर एनसीसीएस को मौजूदा दिशा-निर्देशों और नियमों के किसी उल्लंघन का पता चलता है, तो एनसीसीएस प्रमाण पत्र को निलंबित/रद्द कर सकता है।

प्रभाग सामान्य प्रशासन, कर्मचारी और स्थापना मामले, लोक शिकायत निवारण, आरटीआई प्रश्नों का जवाब देना, विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर महत्वपूर्ण घटनाओं / उपलब्धियों के बारे में वकालत / सार्वजनिक जागरूकता, सेवा रिकॉर्ड और ई-एचआरएमएस से संबंधित मामलों को बनाए रखना, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और आईजीओटी मामले, माल और सेवाओं की खरीद, बजट और लेखा परीक्षा मामले, कार्यशालाओं, सम्मेलन और प्रस्तुतियों का आयोजन, भवन निर्माण कार्य, संसदीय मामलों का जवाब देना, कानूनी सलाहकार की नियुक्ति सहित अदालती मामलों को संभालना, सतर्कता मामले और अन्य नियमित प्रशासनिक कार्य भी करता है।