NCCS के बारे में

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NCCS के बारे में

भारतीय टेलीग्राफ (संशोधन) नियम, 2017 में प्रावधान है कि प्रत्येक दूरसंचार उपकरण को भारत में बिक्री, आयात या उपयोग से पहले 
अनिवार्य परीक्षण और प्रमाणीकरण से गुजरना होगा। दूरसंचार विभाग के आदेश के अनुसार, दूरसंचार उपकरण (एमटीसीटीई) के अनिवार्य परीक्षण
और प्रमाणन की प्रक्रिया अक्टूबर 2018 में तैयार की गई थी। परीक्षण और प्रमाणन ढांचे के लिए आवश्यक है कि दूरसंचार उपकरण निम्नलिखित
आवश्यकताओं के तहत आवश्यक आवश्यकताओं को पूरा करें: ए. ईएमआई/ईएमसी बी. सुरक्षा सी. तकनीकी आवश्यकताएं डी. अन्य आवश्यकताएँ ई. सुरक्षा आवश्यकताएँ परीक्षण यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जाता है कि उपकरण प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करता है जैसे कि इसका उपयोग
करना सुरक्षित है, इससे रेडियो फ्रीक्वेंसी उत्सर्जन निर्धारित सीमा के भीतर है, यह उस नेटवर्क के प्रदर्शन को खराब नहीं करता है जिससे यह जुड़ा है।
जुड़ा हुआ है और राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं का अनुपालन करता है। आवश्यक आवश्यकताओं (ईआर) के तहत दूरसंचार उपकरणों के प्रमाणीकरण के लिए
कुछ दूरसंचार नेटवर्क तत्वों के लिए एमटीसीटीई योजना 01/10/2019 को शुरू की गई थी। DoT ने 'संचार सुरक्षा प्रमाणन योजना' (कॉमसेक)
नामक एक योजना के माध्यम से सुरक्षा आवश्यकताओं के संबंध में अनिवार्य परीक्षण और प्रमाणन लागू करने की परिकल्पना की है। राष्ट्रीय संचार सुरक्षा केंद्र (एनसीसीएस) दूरसंचार विभाग (डीओटी) के तहत एक केंद्र है जो इस योजना के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है।
भारत सरकार ने सुरक्षा मानकों के विकास को सुविधाजनक बनाने और एक रेफरल प्रयोगशाला के रूप में कार्य करने के लिए एनसीसीएस
(तत्कालीन सुरक्षा आश्वासन मानक सुविधा) की स्थापना की है। इस सुविधा का उद्घाटन माननीय संचार मंत्री श्री मनोज सिन्हा द्वारा 15 नवंबर 2018
को किया गया। योजना कॉमसेक योजना का प्रबंधन योजना नियंत्रक द्वारा किया जाता है। एनसीसीएस का लक्ष्य कॉमसेक योजना के संचालन और रखरखाव में निम्नलिखित
उद्देश्यों को पूरा करना है: देश विशिष्ट मानकों, प्रक्रियाओं और विशिष्टताओं का विकास। परीक्षण और प्रमाणन इको-सिस्टम का विकास। सुनिश्चित करें कि दूरसंचार नेटवर्क तत्व सुरक्षा आश्वासन आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। सुरक्षा परीक्षण से संबंधित नियामक आवश्यकताओं का अनुपालन सुनिश्चित करें योजना में मुख्य रूप से तीन प्रमुख गतिविधियाँ शामिल हैं: प्रत्येक दूरसंचार उपकरण के लिए देश विशिष्ट सुरक्षा आश्वासन मानकों का विकास, जिन्हें भारतीय दूरसंचार सुरक्षा आश्वासन आवश्यकताएँ (ITSAR) कहा
जाता है निर्दिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने वाले तृतीय-पक्ष दूरसंचार सुरक्षा परीक्षण प्रयोगशालाओं (TSTL) का पदनाम। नामित टीएसटीएल आईटीएसएआर की
आवश्यकताओं के अनुसार दूरसंचार उपकरणों की सुरक्षा परीक्षण करने के लिए जिम्मेदार होंगे एनसीसीएस द्वारा आईटीएसएआर के विरुद्ध दूरसंचार उपकरण का मूल्यांकन और प्रमाणन। सुरक्षा प्रमाणन का दायरा: प्रमाणीकरण का दायरा भारत में बेचे जाने वाले और भारतीय दूरसंचार नेटवर्क से जुड़ने वाले सभी प्रकार के दूरसंचार उपकरणों को कवर करेगा,
एक बार यह योजना शुरू हो जाने के बाद, उन तत्वों के लिए जिनके लिए ITSAR उपलब्ध है और लागू है (अधिसूचित तिथि से) अलग से)।
कोई भी मूल उपकरण निर्माता (ओईएम)/आयातकर्ता/डीलर जो भारत में किसी भी दूरसंचार उपकरण को बेचना, आयात करना या उपयोग करना चाहता है,
उसे अपने उपकरण सुरक्षा परीक्षण और प्रमाणित कराना होगा। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।