NCCS के कार्य

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NCCS के कार्य

राष्ट्रीय संचार सुरक्षा केंद्र (एनसीसीएस) दूरसंचार विभाग (डीओटी) के तहत एक केंद्र है जो संचार सुरक्षा प्रमाणन योजना के कार्यान्वयन 
के लिए जिम्मेदार है। कॉमसेक योजना का प्रबंधन योजना नियंत्रक द्वारा किया जाता है।
एनसीसीएस का लक्ष्य कॉमसेक योजना के संचालन और रखरखाव में निम्नलिखित उद्देश्यों को पूरा करना है
:
  • देश विशिष्ट मानकों, प्रक्रियाओं और विशिष्टताओं का विकास।
  • परीक्षण और प्रमाणन इको-सिस्टम का विकास।
  • सुनिश्चित करें कि दूरसंचार नेटवर्क तत्व सुरक्षा आश्वासन आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
  • सुरक्षा परीक्षण से संबंधित नियामक आवश्यकताओं का अनुपालन सुनिश्चित करना
  
योजना में मुख्य रूप से तीन प्रमुख गतिविधियाँ शामिल हैं:
  • प्रत्येक दूरसंचार उपकरण के लिए देश विशिष्ट सुरक्षा आश्वासन मानकों का विकास, जिन्हें भारतीय दूरसंचार सुरक्षा आश्वासन आवश्यकताएँ (ITSAR) कहा जाता है।
  • निर्दिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने वाले तृतीय-पक्ष दूरसंचार सुरक्षा परीक्षण प्रयोगशालाओं (TSTL) का पदनाम। नामित टीएसटीएल 
    आईटीएसएआर की आवश्यकताओं के अनुसार दूरसंचार उपकरणों की सुरक्षा
    परीक्षण करने के लिए जिम्मेदार होंगे।
  • एनसीसीएस द्वारा आईटीएसएआर के विरुद्ध दूरसंचार उपकरण का मूल्यांकन और प्रमाणन।
    
वरिष्ठ डीडीजी, एनसीसीएस, जो योजना नियंत्रक भी हैं, एनसीसीएस के प्रमुख हैं। एनसीसीएस को तीन प्रभागों में संगठित किया गया है। 
प्रत्येक प्रभाग का नेतृत्व एक डीडीजी स्तर का अधिकारी करता है।
  1. सुरक्षा आश्वासन मानक (एसएएस) प्रभाग: यह प्रभाग ITSARs, परीक्षण प्रक्रियाओं, सर्वोत्तम वर्तमान प्रथाओं, सुरक्षा परीक्षण उपकरणों की 
    पहचान और सुरक्षा आश्वासन मानक सुविधा
    (एसएएसएफ) के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है।
    एसएएस डिवीजन किसी भी सुरक्षा उल्लंघन की रिपोर्ट और रेफरल मामलों में नेटवर्क तत्वों के परीक्षण के लिए भी जिम्मेदार है।
  2. सुरक्षा प्रयोगशाला मान्यता/पदनाम (एसएलआर) प्रभाग: एसएलआर प्रभाग टीएसटीएल द्वारा पूरी की जाने वाली आवश्यकताओं के साथ-साथ 
    टीएसटीएल पदनाम तंत्र को अधिसूचित करने
    , टीएसटीएल के पदनाम से जुड़ी सभी
    गतिविधियों का संचालन करने और एक प्रमाण पत्र जारी करके टीएसटीएल को नामित करने के लिए जिम्मेदार है।
  3. सुरक्षा प्रमाणन और मुख्यालय (एससी एवं मुख्यालय) प्रभाग: यह प्रभाग सफलतापूर्वक परीक्षण किए गए दूरसंचार उपकरणों के लिए सुरक्षा प्रमाणपत्र 
    जारी करने के लिए जिम्मेदार है।
    
  • भारतीय टेलीग्राफ नियम, 1951, भाग XI, टेलीग्राफ का परीक्षण और प्रमाणन (नियम 528 से 537) यह प्रावधान करता है कि प्रत्येक दूरसंचार 
    उपकरण को पूर्व अनिवार्य परीक्षण और प्रमाणन से गुजरना होगा। प्रमाणन प्रक्रिया यह सुनिश्चित
    करने का प्रयास करती है कि प्रत्येक दूरसंचार उपकरण आवश्यक देश विशिष्ट दूरसंचार सुरक्षा मानकों और आवश्यकताओं अर्थात् भारतीय दूरसंचार
    सुरक्षा आश्वासन आवश्यकताओं
    (आईटीएसएआर) का अनुपालन करता है।
  • इसके बाद, कोई भी मूल उपकरण निर्माता (ओईएम)/आयातक/डीलर जो भारत में किसी भी दूरसंचार उपकरण को बेचने, आयात करने या 
    उपयोग करने की इच्छा रखता है
    , उसे अपने उपकरण सुरक्षा का परीक्षण और एनसीसीएस द्वारा
    प्रमाणित कराना होगा। योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।
  • सुरक्षा प्रमाणन के दायरे में संचार सुरक्षा प्रमाणन (कॉमसेक) योजना के प्रभावी होने की तारीख के बाद भारत में बेचे जाने वाले या भारतीय दूरसंचार 
    नेटवर्क से जुड़े होने वाले सभी प्रकार के दूरसंचार उपकरण शामिल हैं
    , जिसके लिए ITSAR

    उपलब्ध है और लागू है (सरकार द्वारा अलग से अधिसूचित की जाने वाली तारीख से)।
  • अपने उपकरण प्रमाणित कराने के इच्छुक आवेदकों को एमटीसीटीई पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। सफल मूल्यांकन के बाद, आवेदक 
    लागू
    ITSAR के विरुद्ध अपने उपकरण के सुरक्षा परीक्षण के लिए एक निर्दिष्ट TSTL चुन सकता है।
    परीक्षण पूरा होने के बाद
    , टीएसटीएल द्वारा प्रस्तुत परीक्षण रिपोर्ट का सुरक्षा प्रमाणीकरण के लिए एनसीसीएस द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा। सफल
    मूल्यांकन पर
    , प्रमाणपत्र एनसीसीएस के सुरक्षा प्रमाणन प्रभाग द्वारा जारी किया जाएगा।
  • उपकरण के लिए जारी किए गए सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख से दस वर्षों के लिए वैध होंगे, जो समय-समय पर संशोधित लागू ITSAR के 
    अनुपालन के अधीन होंगे। इसके अलावा
    , यदि एनसीसीएस को मौजूदा दिशानिर्देशों और
    नियमों के किसी भी उल्लंघन की जानकारी मिलती है
    , तो एनसीसीएस प्रमाणपत्र को निलंबित/रद्द कर सकता है।
  • प्रभाग सामान्य प्रशासन, कर्मचारी और स्थापना मामले, सार्वजनिक शिकायत निवारण, आरटीआई प्रश्नों का जवाब देना, विभिन्न सोशल मीडिया 
    प्लेटफार्मों में महत्वपूर्ण घटनाओं
    / उपलब्धियों की वकालत / सार्वजनिक जागरूकता,

    सेवा रिकॉर्ड और ई-एचआरएमएस से संबंधित मामलों को बनाए रखना, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और आईजीओटी मामले, वस्तुओं और सेवाओं
    की खरीद
    , बजट और ऑडिट मामले, कार्यशालाओं, सम्मेलन और प्रस्तुतियों का आयोजन, भवन निर्माण कार्य, संसदीय मामलों का जवाब देना,
    कानूनी मामलों सहित अदालती मामलों को संभालना भी प्रबंधित करता है। परामर्श, सतर्कता मामले और अन्य नियमित प्रशासनिक कार्य।